uljnaa mazbooriyaa te farzaa di anhi bheedh ch
jo tainu kehna si khud to v lkauna pe reha e
ਉਲਜਨਾ ਮਜਬੂਰੀਆ ਤੇ ਫਰਜਾ ਦੀ ਅੰਨ੍ਹੀ ਭੀੜ ਵਿੱਚ,
ਜੋ ਤੈਨੂ ਕਹਿਣਾ ਸੀ ਖੁਦ ਤੋਂ ਵੀ ਲਕੋਣਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਏ ☺️
uljnaa mazbooriyaa te farzaa di anhi bheedh ch
jo tainu kehna si khud to v lkauna pe reha e
ਉਲਜਨਾ ਮਜਬੂਰੀਆ ਤੇ ਫਰਜਾ ਦੀ ਅੰਨ੍ਹੀ ਭੀੜ ਵਿੱਚ,
ਜੋ ਤੈਨੂ ਕਹਿਣਾ ਸੀ ਖੁਦ ਤੋਂ ਵੀ ਲਕੋਣਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਏ ☺️
महर-ओ- वफ़ा की शमआ जलाते तो बात थी
इंसानियत का पास निभाते तो बात थी
जम्हूरियत की शान बढ़ाते तो बात थी
फ़िरक़ा परस्तियों को मिटाते तो बात थी
जिससे कि दूर होतीं कुदूरत की ज़ुल्मतें
ऐसा कोई चराग़ जलाते तो बात थी
जम्हूरियत का जश्न मुबारक तो है मगर
जम्हूरियत की जान बचाते तो बात थी
ज़रदार से यह हाथ मिलाना बजा मगर
नादार को गले से लगाते तो बात थी
बर्बाद होने का तो कोई ग़म नहीं मगर
अपना बनाके मुझको मिटाते तो बात थी
हिंदुस्तान की क़सम ऐ रेख़्ता हूँ ख़ुश
पर मुंसिफ़ी की बात बताते तो बात थी
चांद को भी है गुरूर लौटकर उसका शान आया है
सज चुका है चांद के सिर पर ताज क्योकि उसकी खातिर पूरा हिंदुस्तान आया है
कैसे करे बया दिल की हालत को
हमे भी चांद पर बहुत प्यार आया है