
Akhiyan shaddna ron nu..!!
Kinne ku din hor paye ne
Ohde mere ikk hon nu..!!
Enjoy Every Movement of life!

मैं मुकम्मल होके भी अधूरा ही रहा हु ,
तमाम आजमइशों के बाद भी अकेला ही रहा हु ।
मैं हर बार करता रहा जिसकी हसी की दुआ
बदले मे इसके हर बार रोता रहा हूँ ।
हर बार बेवजह रूठता है कोई मुझसे
लाख कोशिशों के बाद भी खुद को खोटा रहा हूँ ।
मेरी कोशीशे मिटा रही है तमाम जख्मो को मेरे ,
दूसरी तरफ जज़बातो की आड़ मे एनहे खुरेद रहा हूँ ।
जमीन जल चुकी है आसमान बाकी है
वो जो खेतों की मेड़ो पर उदास बैठे हैं
उन्हीं की आंखों में अबतक ईमान बाकी है
बादलों अब तो बरस जाओ सूखी जमीनों पर
किसी का घर गिरवी है और किसी का लगान बाकी है