किस अदा में उसकी जादू है, ये कहना थोड़ा मुश्किल है..
उन आँखों ने जो दर्द दिया, वो सहना थोड़ा मुश्किल है..
झूठे प्यार की लहरों में उसकी, मेरा बहना थोड़ा मुश्किल है..
उसके दिल में ना जाने कित-नों की जगह है, मेरा रहना थोड़ा मुश्किल है..
किस अदा में उसकी जादू है, ये कहना थोड़ा मुश्किल है..
उन आँखों ने जो दर्द दिया, वो सहना थोड़ा मुश्किल है..
झूठे प्यार की लहरों में उसकी, मेरा बहना थोड़ा मुश्किल है..
उसके दिल में ना जाने कित-नों की जगह है, मेरा रहना थोड़ा मुश्किल है..
माथे पे तिलक लगाकर कूद पड़े थे अंग़ारो पे,
माटी की लाज के लिए उनके शीश थे तलवारों पे।
भगत सिंह की दहाड़ के मतवाले वो निर्भर नहीं थे किन्ही हथियारों पे,
अरे जब देशहित की बात आए तो कभी शक ना करो सरदारों पे॥
आज़ादी की थी ऐसी लालसा की चट्टानों से भी टकरा गये,
चंद आज़ादी के रणबाँकुरो के आगे लाखों अंग्रेज मुँह की खा गये।
विद्रोह की हुंकार से गोरों पे मानो मौत के बादल छा गये,
अरे ये वही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव है जिनकी बदौलत हम आज़ादी पा गये॥
आज़ादी मिली पर इंक़लाब की आग में अपने सब सुख-दुःख वो भूल गये,
जननी से बड़ी माँ धरती जिसकी ख़ातिर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु झूल गये॥
अब राह तक रही उस माँ को कौन जाके समझाएगा,
कैसे बोलेगा उसको की माँ अब तेरा लाल कभी नहीं आएगा।
बस इतना कहूँगा कि धन्य हो जाएगा वो आँचल जो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु सा बेटा पाएगा,
क्योंकि इस माटी का हर कण और बच्चा-बच्चा उसे अपने दिल में बसाएगा॥
too badanaam na ho,
sirph isaliye jee raha hoon mai,
varana teree chaukhat pe marane ka,
iraada to roz hee hota hai
तू बदनाम ना हो,
सिर्फ इसलिये जी रहा हूं मै,
वरना तेरी चौखट पे मरने का,
इरादा तो रोज़ ही होता है