किस हरम में जाती होगी रूह,
ये जिस्म छोड़ने के बाद, पता नही...
लगता है वहां सुकून बहुत मिलता होगा,
वरना हर किसी का मुकद्दर वही नही होता...
किस हरम में जाती होगी रूह,
ये जिस्म छोड़ने के बाद, पता नही...
लगता है वहां सुकून बहुत मिलता होगा,
वरना हर किसी का मुकद्दर वही नही होता...
अगर है प्यार मुझसे तो बताना भी ज़रूरी है
दिया है हुस्न मौला ने दिखाना भी ज़रूरी है
इशारा तो करो कभी मुझको अपनी निगाहों से
अगर है इश्क़ मुझसे तो जताना भी ज़रूरी है
अगर कर ले सभी ये काम झगड़ा हो नहीं सकता
ख़ता कोई नजर आए छुपाना भी ज़रूरी है
अगर टूटे कभी रिश्ता तुम्हारी हरकतों से जब
पड़े क़दमों में जाकर फिर मनाना भी ज़रूरी है
कभी मज़लूम आ जाए तुम्हारे सामने तो फिर
उसे अब पेट भर कर के खिलाना भी ज़रूरी है
अगर रोता नजर आए कभी मस्जिद या मंदिर में
बड़े ही प्यार से उसको हँसाना भी ज़रूरी है
~ मुहम्मद आसिफ अली
Darr rehnda e mann ch
Tethon door jaan da
Tere door hon da.!!
ਡਰ ਰਹਿੰਦਾ ਏ ਮਨ ‘ਚ
ਤੈਥੋਂ ਦੂਰ ਜਾਣ ਦਾ
ਤੇਰੇ ਦੂਰ ਹੋਣ ਦਾ..!!