
Ikko mileya e poore sansar varga..!!
Mein frol aayi jagg kayi kar koshisha
Menu koi nahio labbha mere yaar warga..!!

ख़िज़ाँ का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
किसे ख़बर थी बिछड़कर न मिल सकेंगे कभी
न ख़त्म होगा तेरे इन्तिज़ार का मौसम
ग़रज़ का दौर है सबको हैं अपनी अपनी धुन
किसी को रास न आया पुकार का मौसम
ढला है हुस्न तो मशहूर बेवफ़ाई हुई
गुज़र गया है तेरे इन्तिज़ार का मौसम
उड़ाए फिरती है आवारगी की आंधी हमें
हमें नसीब कहाँ ज़ुल्फ़-ए- यार का मौसम
बुझे हैं रेख़्ता हम तो बुझे नज़ारे हैं
उदास उदास लगा हुस्न -ए- यार का मौसम
kehna si auhda kade chhadange nahi ik dooje nu
auhda kehna kehna hi reh gya
ਕੇਹਣਾ ਸੀ ਔਂਦਾ ਕਦੇ ਛੱਡਾਂਗੇ ਨਹੀਂ ਇਕ ਦੁਜੇ ਨੂੰ
ਔਂਦਾ ਕੇਹਣਾ ਕੇਹਣਾ ਹੀ ਰੇਹ ਗਿਆ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷