
Tidke gharre de paani vaangu
me v tip tip karke suk jaana
kujh keh jaane raaz dilaan de
te kujh keh ke muk jaana

Tidke gharre de paani vaangu
me v tip tip karke suk jaana
kujh keh jaane raaz dilaan de
te kujh keh ke muk jaana
जीवन में वह था एक कुसुम,
थे उस पर नित्य निछावर तुम,
वह सूख गया तो सूख गया;
मधुवन की छाती को देखो,
सूखीं कितनी इसकी कलियाँ,
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ जो
मुरझाईं फिर कहाँ खिलीं;
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है;
जो बीत गई सो बात गई!
जीवन में मधु का प्याला था,
तुमने तन-मन दे डाला था,
वह टूट गया तो टूट गया;
मदिरालय का आँगन देखो,
कितने प्याले हिल जाते हैं,
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं,
जो गिरते हैं कब उठते हैं;
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है!
जो बीत गई सो बात गई!
मृदु मिट्टी के हैं बने हुए,
मधुघट फूटा ही करते हैं,
लघु जीवन लेकर आए हैं,
प्याले टूटा ही करते हैं,
फिर भी मदिरालय के अंदर
मधु के घट हैं, मधुप्याले हैं,
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं;
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट-प्यालों पर,
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है, चिल्लाता है!
जो बीत गई सो बात गई!
Chahatein badhne lgi hain tumse milne ke baad,
Din kab gujra ye bhi nhi tha mujhko yaad,
Phir waqt ke namanzuri ne nhi smjhe mere jazbaat,
Kya pta tha vo shaam mein hui thi humari aakhrimulaqat…….
चाहतें बढ़ने लगी हैं तुमसे मिलने के बाद
दिन कब गुज़रा ये भी नही था मुझको याद,
फिर वक़्त के नामंजूरी ने नहीं समझे मेरे जज़्बात,
क्या पता था वो शाम में हुई थी हमारी आखरी मुलाकात…