लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
Enjoy Every Movement of life!
लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
कभी ना कभी तो उनकी आँखों में मेरा अक्स दिखा देगा..
जो उन्हें आज भी बेताहाशा चाहता है, वो शक्श दिखा देगा..
जब जमाने ने ठुकरा दिया उनको, तब अपनी नजरों में पनाह दी थी..
फिर से जब जमाना उन्हें ना-गवार होगा, तब दोबारा मेरी ओर उन्हें लक्ष दिखेगा..
