लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
मनाता हूं तो मान जाती है, फितरत तो आज भी वैसी है..
जहां जाकर भी वो मुझे ना भूली, ना जाने वो दुनिया कैसी है..
ना कर सका अलग उसे खुदा भी मुझसे, मेरे प्यार की ताकत ऐसी है..
उसके बाद ना मिला मुझे कोई भी ऐसा, जिसे कह सकूँ के उसके जैसी है..
Tenu Milan di aas ch Mardi jawa
Samjh na aawa menu mein🥰..!!
Jad mile ta akh Nam kar lwa
Gal launa ghutt ke tenu mein😍..!!
ਤੈਨੂੰ ਮਿਲਣ ਦੀ ਆਸ ‘ਚ ਮਰਦੀ ਜਾਵਾਂ
ਸਮਝ ਨਾ ਆਵਾਂ ਮੈਨੂੰ ਮੈਂ🥰..!!
ਜਦ ਮਿਲੇ ਤਾਂ ਅੱਖ ਨਮ ਕਰ ਲਵਾਂ
ਗੱਲ ਲਾਉਣਾ ਘੁੱਟ ਕੇ ਤੈਨੂੰ ਮੈਂ😍..!!