लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।
Mai tera ashiq hu parwana hu
Koi ishq puche to ishq ka pura jamana hu..
Or tu kehti hai ki mai teri itni fikr na kiya kru
Are pagli khud ko kaise roku mai tera diwana hu…😍