लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
लफ्ज़ दर लफ्ज़ बढ़ती गई
चाहत कुछ लिखने की,
ज़हन के खाली पन्नों में कोई मुद्दतों से नहीं उतरा...
ਕਾਸ਼ !!
ਮੈਂ ਜਾਣਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਅਣਜਾਣ ਨਾ ਹੁੰਦਾ
ਕਾਸ਼ !!
ਕਿਸੇ ਪੱਥਰ ਦਿਲ ਨਾਲ ਪਿਆਰ ਨਾ ਹੁੰਦਾ
ਜਾ ਕੋਈ ਇਨਸਾਨ ਪੱਥਰ ਦਿਲ ਨਾ ਹੁੰਦਾ
kaash!!
main jande hoe v anjaan na hunda
kaash!!
kise pathar dil naal pyaar naa hunda
ya koi insaan pathar dil naa hunda
तनहाई तलाश रही मुझको, और मुझे तलाश है बस तेरी..
गर मुमकिन है तो आ जाओ, इंतजार में नजरें हैं मेरी..
इंहे नींद नहीं अब आती है, राहों में टिकी हैं ये तेरी..
यकीन न इनको होता है, के तूने भी आंखें हैं फेरी..
समझाऊं केसे मैं इनको, किस्मत में नहीं है तू मेरी..
जिन आंखों को हैं ये ढूंढ़ रही, बंद हैं वो आंखें तेरी..
जेसे दिल है हार गया मेरा, वैसे हारेगी अब रूह मेरी..
अब थक कर ये सोएंगी जब, होगी जिस्म से जान जुदा मेरी..