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Shayari | Latest Shayari on Hindi, Punjabi and English

खो गई थी धड़कनें जो कहीं

खो गई थी धड़कनें जो कहीं
वो वापस ले आया हूं मैं,
थोड़ी ठीक है थोड़ी ज़ख्मी हैं
फिर भी वापस ले आया हूं मैं,
क्या बातें थी याद करो तो दिल बैठ गया,
कदम लड़खड़ाते रहे, वो पल याद आते रहे,
आज बहकते बहकते ही सही,
खुद को वापस ले आया हूं मैं,
हाथ ज़ख्मों पर हैं,
और ज़ख्म धड़कनों पर,
बाजी पलटती रही,
हम धड़कनें लगाते रहे ज़ख्मों पर,
थोड़ी देर और सही,
आज शाम नहीं कल की सवेर सही,
घर तो लौट आया हूं मैं,
देखो खुदको वापस ले आया हूं मैं.....

Najre uthaa kar dekhne walo ||katal shayari

नज़रें उठा कर देखने वालों का क़त्ल कर,

वो एक फूल रख जाते हैं,
कयामत हैं अदाएं और जाते वक्त,

अपना गुनाह कबूल कर जाते हैं,
वाकिफ है ज़माना उसके क़त्ल ए आम के हुनर से,

लेकिन,
अक्सर आशिक नज़रें उठा कर उसके सामने,

वही भूल कर आते है...
वो उनका कत्ल कर बस एक फूल रख जाते हैं....

Dhoondte hai tasveere teri || tasveer shayari hindi

ढूंढते हैं तस्वीरें तेरी, तेरी तस्वीर देखकर,
इश्क का वो पल फिर, दोबारा मिला नहीं,
मेरे ज़ख्मों में जो लगा था, मरहम तेरे होंठों का,
तेरे ही दिए ज़ख्मों को, वो मरहम मिला नहीं,
दर बदर ढूंढा खुदको, इक वजूद की तलाश में,
वो मरहम तो मिला नहीं, वो महरम भी मिला नहीं...

Khusboo nahi hai mujhme || sad love shayari

खुशबू नहीं है मुझमें,
पर गुलशन महकाएं बहुत है...
मुझे आज़माया नहीं किसी ने,
मैनें अपनें आज़माएं बहुत हैं...
मैं रौनक पसंद हूं पर रौनक नहीं है मुझमें,
बुला रहे हो महफिल में वो झलक नहीं मुझमें...
इंतजाम मेरी खातिर बस इतना कर लेना
कड़वा हूं मैं,
कुछ कहूं तो मेरे होंठो पर ज़हर रख देना....

वWaqt hai aajh || 2 lines shayari sad

waqt hai aaj, katal kar do mera
kal duaon mujhe nawaza jayega
वक्त है आज, क़त्ल कर दो मेरा,
कल दुआओं मुझे नवाज़ा जाएगा...

AAhat nahi thu || waqt shayari

आहट नहीं थी, सुर्ख़ हवाओं में वक्त ना लगा,
वक्त कम था, वो लम्हा गुजरने में वक्त ना लगा,
मैं वक्त का तकाज़ा ले कर बैठा था
चंद खुशियों के इंतजार में,
मेरा घर टूट के बिखरने में वक्त न लगा...

Me tumhe tumse jaida jaanta hu || hindi love shayari

मैं तुम्हे तुमसे ज्यादा जानता हूं,
मैं तुम्हारे दिल का हर किनारा जानता हूं,
जो कहते नहीं वो आंखों से बता देते हो,
मैं तुम्हारी नजरों का हर इशारा जानता हूं
जानता हूं हाथ थाम कर चलना पसंद है तुम्हे,
फिर कांधे में सिर रखकर बैठना पसंद है तुम्हे,
पानी में लिखकर नाम अक्सर मिटा देते हो,
मेरे साथ रहने का तुम्हारा हर बहाना जानता हूं,
मैं तुम्हारे दिल का हर किनारा जनता हूं...

Yeh baat chubti bhi toh hai

कुछ नहीं है बात में, ये बात चुभती भी तो है,
भोर की पहली किरण भी सांझ में ढलती तो है,
उड़ता हूं मैं बाज़ सा आसमां की उस ऊंचाई में,
जिस तेज ताप पर, थोड़ी हवा चलती तो है,
गिरता हूं मैं उठता हूं कभी धरती कभी अंगड़ाई पे
जिंदगी भी दर बदर पर, जिंदगी चलती तो है,
बात इतनी ही नहीं के कायदे भी अब रो रहे,
सर झुका कर चलती दुनिया देख खलती भी तो है...