Sanu sajjan hi jano pyare..!!
Sanu sajjan hi khushiyan khede ne
Sanu sajjan hi hanju khare..!!
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
ਸਾਰੀ ਰਾਤ ਰੋਣਾ ਸਭ ਤੋਂ ਦੁੱਖ ਛਪਾਉਣਾ ਸਵੇਰੇ ਉੱਠ ਫਿਰ ਮਸਕ੍ਰਾਉਣਾ ਸੌਖਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ।…💫💚
Sari raat rona sab to dukh chpauna sware uth ke fir mukarana sokha nhi hunda|….💫💚