Enjoy Every Movement of life!
गरीबी भी देखी है अमीरी भी देखी है,
फटे थे कपड़े जब वो फकीरी भी देखी है...
हाथों में रोटी थी कटोरे में सिक्के थे,
अनजान चेहरों की बहुत हाज़िरी भी देखी है,
उम्दा सियासत में गुनहगारों की वजीरी भी देखी है...
इंसानियत दम तोड रही थी बंजर दरिया में
वो ढलती शाम मैने आखिरी देखी है...

Hath jakhmi kraa ke asin apne
kandeyaan lai ful sajaunde rahe
satt lagi si meri galti naal
si pathraan nu mom bnaunde rahe
