“Kehnde maaan tera karna v bandaaaa,
pasand teri uttee lakhaan mardeee…”
“Kehnde maaan tera karna v bandaaaa,
pasand teri uttee lakhaan mardeee…”
मूक प्राणियों पर हमको तो,
तरस बहुत ही आता है।
इनकी देख दुर्दशा अपना,
सीना फटता जाता है।।
वन्य जीव जितने भी हैं,
सबका अस्तित्व बचाना है,
जंगल के जीवों के ऊपर,
दया हमें दिखलाना है।
वृक्ष अमूल्य धरोहर हैं,
इनकी रक्षा करना होगा।
जीवन जीने की खातिर,
वन को जीवित रखना होगा।
तनिक-क्षणिक लालच को,
अपने मन से दूर भगाना है।
धरती का सौन्दर्य धरा पर,
हमको वापिस लाना है।।
क्यों किया तुमने ऐसा,
क्या बिगाड़ा था मैने तुम्हारा
थोड़ा प्यार किया था,कुछ दिल लगाया था
तुमने तो इतनी बड़ी सजा दे दी
के
मुझे किसी से दिल लगाने लायक ही नहीं छोड़ा
अरे छोड़ते भी तो क्या, अब तो सीने में दिल ही नहीं रहा
तुझे रब का वास्ता, तुझे तेरे सबसे अजीज का वास्ता
ये जान भी ले ले
ये जिस्म थक चुका है इस मरी हुई रुह का बोझ उठाते उठाते