एक रात जब दरवाजे पर दस्तक हुई, तो लगा कोई आया होगा..
आख़िर देर रात ये है कौन। कहीं कोई बुरी खबर तो ना लाया होगा..?
बिस्तर से उठा घबराहट के साथ, रात ताला भी तो लगाया होगा..
चाबी ना जाने कहां रख दी मैंने, ऐसा होगा, रात दिमाग में ना आया होगा..
चाबी लेकर दौड़ा दरवाजे की ओर, दरवाजा तो खोलू, शायद कोई घबराया होगा..
दरवाज़ा खोला कोई नहीं था, ये कोई मज़ाक का वक़्त है, जो दरवाज़ा खटखटाया
होगा..
ना जाने कौन था ये, जो इतनी रात गऐ मेरे दर पे आया होगा..?
पूरी रात निकल गई सोचने में, ये मेरा वहम था, या सच में कोई आया होगा..
Tere angaan di khushbu nu
main sadaa lai sahaan vich vsaa lyaa
te ehna naina de motiyaan nu lafzaan vich pro k
dil di dhadkan bna lya
ਤੇਰੇ ਅੰਗਾਂ ਦੀ ਖੁਸ਼ਬੂ ਨੂੰ
ਮੈਂ ਸਦਾ ਲਈ ਸਾਹਾਂ ਵਿੱਚ ਵਸਾ ਲਿਆ
ਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੈਣਾਂ ਦੇ ਮੋਤੀਆਂ ਨੂੰ
ਲਫਜ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਪਰੋ ਕੇ
ਦਿਲ ਦੀ ਧੜਕਨ ਬਣਾ ਲਿਆ