Enjoy Every Movement of life!
क्यों किसा मोहब्बत का यह खोला जाये
किताबें इश्क की यह बंद ही अच्छी लगती हैं
अब याद करके उन्हें आंसू क्यों ग्वाय हम
हमें यह जुदाई हीं अब अच्छी लगती हैं
—गुरू गाबा 🌷
समंदर सी उसकी आंखें थी, डूबा तो किनारा खो गया..
दिल मेरा जंगल का शेर सा था, लहरों में बेचारा रो गया..
शुक्र है वहां कश्ती मिली मुझे, कश्ती से सहारा हो गया..
बाहर आया जब उसकी आँखों से, उसके इश्क का मारा हो गया..
