“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
Enjoy Every Movement of life!
“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ,
हरा भरा जीवन बनाओ।
छाया ये हमको देते है,
फल ये हमको देते है।
बाढ़ से हमको बचाते है,
प्रदुषण दूर हटाते हैं,
हम भी पेड़ लगाएंगे,
संसार को हरा भरा बनाएंगे।
मिलेगी परिंदों को मंजिल यकीनन
यह उनके फैले हुए पर बोलते है
अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं
जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं