“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
Garmi ka mausam…
Aur tera kehar uspar…
Mar na jaye kahin hm tere bankar…😍
गर्मी का मौसम…
और तेरा कहर उसपर…
मर न जाएं कहीं हम तेरे बनकर…😍
Aakhir mohobbat unhi se kyu hoti hai
Jinhe na to hamari kadar hoti hai Or Na fikar💔..!!
आखिर मोहोब्बत उन्ही से क्यों होती है
जिन्हें न तो हमारी कदर होती है और न फिक्र 💔..!!