“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
Kachi neev ghar ishq di te
karn chaleyaa si bathera me
jado barseyaa meeh ambraa to judai da
sareer rooh rishte zimevaariyaa nu ho majboor chhad chaleyaa me
ਕੱਚੀ ਨੀਵ ਘਰ ਇਸ਼ਕ ਦੀ ਤੇ
ਕਰਨ ਚਲਿਆਂ ਸੀ ਬਸੇਰਾ ਮੈਂ
ਜਦੋਂ ਬਰਸੀਆਂ ਮੀਂਹ ਅੰਬਰਾਂ ਤੋਂ ਜੁਦਾਈ ਦਾ
ਸ਼ਰੀਰ ਰੂਹ ਰਿਸ਼ਤੇ ਜ਼ਿਮੇਵਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਹੋ ਮਜਬੂਰ ਛੱਡ ਚਲਿਆ ਮੈਂ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
चलेगी जब तेरी यादों की पुरवाई तो क्या होगा
पुरानी चोट कोई फिर उभर आई तो क्या होगा,
मुहब्बत ख़ुद ही बन बैठी तमाशाई तो क्या होगा
न हम होंगे, न तुम होंगे, न तनहाई तो क्या होगा,
मुहब्बत की झुलसती धूप और काँटों भरे रस्ते
तुम्हारी याद नंगे पाँव गर आई तो क्या होगा,
ऐ मेरे दिल तू उनके पास जाता है तो जा, लेकिन
तबीअत उनसे मिलकर और घबराई तो क्या होगा,
लबों पर हमने नक़ली मुस्कराहट ओढ़ तो ली है
किसी ने पढ़ ली चेह्रे से जो सच्चाई तो क्या होगा,
सुना तो दूँ मुहब्बत की कहानी मैं तुम्हें लेकिन
तुम्हारी आँख भी ऐ दोस्त भर आई तो क्या होगा,
ख़ुदा के वास्ते अब तो परखना छोड़ दे मुझको
अगर कर दी किसी ने तेरी भरपाई तो क्या होगा..