“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
“मरहम लगा, दर्द कम हुआ, निशान फिर भी रह गए..
चुकाया दाम हकीमा को, एहसान फिर भी रह गए..
ये जख्मी दिल जा बैठा, दवा लगाने वाली की गोद में..
कमबख्त शादी की, ना जानवर बने, ना इंसान ही रह गए…।”
saanu tu injh chahida jive hundi e
piyaase nu paani di lodh
har modh te jaape saanu sirf teri hi thod
ਸਾਨੂੰ ਤੂੰ ਇੰਝ ਚਾਹੀਦਾ
ਜਿਵੇ ਹੁੰਦੀ ਏ ਪਿਆਸੇ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਲੋੜ
ਹਰ ਮੋੜ ਤੇ ਜਾਪੇ ਸਾਨੂੰ ਸਿਰਫ ਤੇਰੀ ਹੀ ਥੋੜ
नज़रें उठा कर देखने वालों का क़त्ल कर, वो एक फूल रख जाते हैं,
कयामत हैं अदाएं और जाते वक्त, अपना गुनाह कबूल कर जाते हैं,
वाकिफ है ज़माना उसके क़त्ल ए आम के हुनर से, लेकिन,
अक्सर आशिक नज़रें उठा कर उसके सामने, वही भूल कर आते है...
वो उनका कत्ल कर बस एक फूल रख जाते हैं....