raati supne ch me aapni maut dekhi
tu nazar ni aaeya mainu ron aaeleyaa ch
ਰਾਤੀ ਸੁਪਨੇ ਚ ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਮੌਤ ਦੇਖੀ👀
ਤੂੰ ਨਜ਼ਰ ਨੀ ਆਇਆ ਮੈਨੂੰ ਰੋਣ ਆਲਿਆ ਚ😭
raati supne ch me aapni maut dekhi
tu nazar ni aaeya mainu ron aaeleyaa ch
ਰਾਤੀ ਸੁਪਨੇ ਚ ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਮੌਤ ਦੇਖੀ👀
ਤੂੰ ਨਜ਼ਰ ਨੀ ਆਇਆ ਮੈਨੂੰ ਰੋਣ ਆਲਿਆ ਚ😭
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——
“फिर आज युंहिं मौसम बदला, चहकती
देखो हर एक डाल है..
मद्धम सी बरसात हुई, छिल गई कई पेड़ों की छाल है..
हर पत्ते हर डाली ने पूछा, क्या दर्द हुआ? क्या तेरा हाल है..
कहा हुआ हूं, नया मैं फिर से, क्या जानो तुम कुदरत कमाल है..
मुझको ताकत दी है इतनी, शक्ति मेरी बेमिसाल है..
हर जीव में सांसें भरता हूं, सब करते मेरा इस्तेमाल है..
काटेंगे मुझे तो भुगतेंगे, कुदरत का कहर सबसे विशाल है..
बे-मौसम जो मौसम बदल रहे हैं, जवाब पता है, फिर भी सवाल है..”