अब कोई भी शायरी तुझे तड़पाती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?
मौसम की हर बहारों से मांगा था !
मैंने तुझको टूटते तारों से मांगा था |
जुदा होके तू शायद ही जी पाती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?
ख़ैर अब मैं भी तुझे भूल रहा हूं !
गलतियां सारी कबूल रहा हूं |
मेरी तस्वीरें तुझे बड़ा सताती होगी !
सच बता मेरी याद तो आती होगी ?
Ohnu dekhe bina bhawe kinne hi din langh gaye hon
par akhan vich vasi tasveer ajhe v
taazi di taazi pai
ਉਹਨੂੰ ਦੇਖੇ ਬਿਨਾ ਕਿੰਨੇ ਹੀ ਦਿਨ ਲੰਘ ਗਏ ਹੋਣ
ਪਰ ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਵਸੀ ਤਸਵੀਰ ਅਜੇ ਵੀ
ਤਾਜੀ ਦੀ ਤਾਜ਼ੀ ਪਈ ਏ