
kyunki mai jazbaat
likhta hu or log alfaaz
padtey hai

Nahi pta kinjh izhaar tenu kara mein
Menu nahi pta dil da haal kive kehna e..!!
Kive tenu bhull ke azad mein hona e
Nahi pta menu tere bina kinjh rehna e..!!
ਨਹੀਂ ਪਤਾ ਕਿੰਝ ਇਜ਼ਹਾਰ ਤੈਨੂੰ ਕਰਾਂ ਮੈਂ
ਮੈਨੂੰ ਨਹੀਂ ਪਤਾ ਦਿਲ ਦਾ ਹਾਲ ਕਿਵੇਂ ਕਹਿਣਾ ਏ..!!
ਕਿਵੇਂ ਤੈਨੂੰ ਭੁੱਲ ਕੇ ਆਜ਼ਾਦ ਮੈਂ ਹੋਣਾ ਏ
ਨਹੀਂ ਪਤਾ ਮੈਨੂੰ ਤੇਰੇ ਬਿਨਾਂ ਕਿੰਝ ਰਹਿਣਾ ਏ..!!
है वो मेरी मोहब्बत की रूह, इसलिए पास मेरे वो रहती है..
मुझे पागल समझेगी ये दुनिया, तभी वो कुछ ना कहती है..
सुबह उठे साथ में वो मेरे, शाम आंखों के साथ वो ढलती है..
वो जी ना सकी जो साथ मेरे, तो मरके साथ में चलती है..
राहें तो बदल गयीं उसकी मगर, राहौं से मुडी वो रहती है..
मेरी रूह से जुडना है हक उसका, तभी साथ जुडी वो रहती है..
हर खुशी बांटती है मेरी, हर गम मेरे संग सहती है..
मुझे वो लगती है अपनी, और मुझे वो अपना कहती है….