Ji aankhe mujhe dekh kar jhuk gai
yakeenan usne kabhi chaha toh zaroor hoga
जो आँखें मुझे देख कर झुक गयी,
यकीनन उसने कभी मुझे चाहा तो ज़रूर होगा !!
Ji aankhe mujhe dekh kar jhuk gai
yakeenan usne kabhi chaha toh zaroor hoga
जो आँखें मुझे देख कर झुक गयी,
यकीनन उसने कभी मुझे चाहा तो ज़रूर होगा !!
काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
Ishq ch pehla hi tadpe hoyian nu
Na hor tadpaya kar sajjna..!!
Sade ronde digde dhehndeya di
Khabar taan le jayia kar sajjna..!!
ਇਸ਼ਕ ‘ਚ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਤੜਪੇ ਹੋਇਆਂ ਨੂੰ
ਨਾ ਹੋਰ ਤੜਪਾਇਆ ਕਰ ਸੱਜਣਾ..!!
ਸਾਡੇ ਰੋਂਦੇ ਡਿੱਗਦੇ ਢਹਿੰਦਿਆਂ ਦੀ
ਖ਼ਬਰ ਤਾਂ ਲੈ ਜਾਇਆ ਕਰ ਸੱਜਣਾ..!!