Ishq da kahda eh rog lag gaya
Sanu naam tere da yara jog lag gaya..!!
ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਕਾਹਦਾ ਇਹ ਰੋਗ ਲਗ ਗਿਆ
ਸਾਨੂੰ ਨਾਮ ਤੇਰੇ ਦਾ ਯਾਰਾ ਜੋਗ ਲਗ ਗਿਆ..!!
Ishq da kahda eh rog lag gaya
Sanu naam tere da yara jog lag gaya..!!
ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਕਾਹਦਾ ਇਹ ਰੋਗ ਲਗ ਗਿਆ
ਸਾਨੂੰ ਨਾਮ ਤੇਰੇ ਦਾ ਯਾਰਾ ਜੋਗ ਲਗ ਗਿਆ..!!
Ik sohna jeha raah hove
Chan vargi raat hove
Tere hath vich mera hath hove
Tera mera chehra khushi naal bhareya hove
Te raah kade mukda he na hove!
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।