Gratitude is one of the strongest and most transformative states of being. It shifts your perspective from lack to abundance and allows you to focus on the good in your life, which in turn pulls more goodness into your reality.
Gratitude is one of the strongest and most transformative states of being. It shifts your perspective from lack to abundance and allows you to focus on the good in your life, which in turn pulls more goodness into your reality.
कल स्कूल खुलेंगे कई दिन बाद
क़ैद से निकलेंगी बच्चियाँ
नए-पुराने दोस्तों से मिलेंगी
मेरी बच्ची भी जाएगी स्कूल
फ़रहाना के साथ लंच शेयर करेगी
जेनिस के साथ खूब बातें करेगी
रवनीत बनेगी बेंच पार्टनर
फ़रहाना बताएगी वॉटर पार्क के क़िस्से
छपछप करती है वह अक्सर जाकर
जेनिस बताएगी कैसे मुर्ग़े की आवाज़ निकालकर
खिड़की के बाहर आता है रोज़
ग़ुब्बारे वाला
रवनीत बताएगी
गुरुद्वारे जाकर दुखभंजनी साहब गाती है वह
हर बुधवार
मेरी बच्ची भी बताएगी
नई जगहों के बारे में
जहाँ मम्मी ले जाती है उसे
बताएगी कोर्ट गयी थी घूमने
पिछले मंगलवार
कोर्ट एक मस्त जगह है
जहाँ मम्मी-पापा बिल्कुल नहीं लड़ते
सिर्फ़ प्यार करते हैं मुझसे।
बताएगी फ़रहाना को
वॉटर पार्क से बुरा नहीं है थाने जाना
पुलिस वाले अंकल देते हैं ख़ूब सारी टॉफ़ियाँ
और पापा से काफ़ी देर बातें करते हैं।
जेनिस को बताएगी
घर पर आती रहती है पुलिस
जैसे उसके यहाँ आता है ग़ुब्बारे वाला।
अगली बार आई पुलिस तो
वह रवनीत से सीखकर
गाएगी दुखभंजनी साहेब
और रोएगी बिल्कुल नहीं।
बीरबल की सूझबूझ और हाजिर जवाबी से बादशाह अकबर बहुत रहते थे। बीरबल किसी भी समस्या का हल चुटकियों में निकाल देते थे। एक दिन बीरबल की चतुराई से खुश होकर बादशाह अकबर ने उन्हें इनाम देने की घोषणा कर दी।
काफी समय बीत गया और बादशाह इस घोषणा के बारे में भूल गए। उधर बीरबल इनाम के इंतजार में कब से बैठे थे। बीरबल इस उलझन में थे कि वो बादशाह अकबर को इनाम की बात कैसे याद दिलाएं।
एक शाम बादशाह अकबर यमुना नदी के किनारे सैर का आनंद उठा रहे थे कि उन्हें वहां एक ऊंट घूमता हुआ दिखाई दिया। ऊंट की गर्दन देख राजा ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, क्या तुम जानते हो कि ऊंट की गर्दन मुड़ी हुई क्यों होती है?”
बादशाह अकबर का सवाल सुनते ही बीरबल को उन्हें इनाम की बात याद दिलाने का मौका मिल गया। बीरबल से झट से उत्तर दिया, “महाराज, दरअसल यह ऊंट किसी से किया हुआ अपना वादा भूल गया था, तब से इसकी गर्दन ऐसी ही है। बीरबल ने आगे कहा, “लोगों का यह मानना है कि जो भी व्यक्ति अपना किया हुआ वादा भूल जाता है, उसकी गर्दन इसी तरह मुड़ जाती है।”
बीरबल की बात सुनकर बादशाह हैरान हो गए और उन्हें बीरबल से किया हुआ अपना वादा याद आ गया। उन्होंने बीरबल से जल्दी महल चलने को कहा। महल पहुंचते ही बादशाह अकबर ने बीरबल को इनाम दिया और उससे पूछा, “मेरी गर्दन ऊंट की तरह तो नहीं हो जाएगी न?” बीरबल ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “नहीं महाराज।” यह सुनकर बादशाह और बीरबल दोनों ठहाके लगाकर हंस दिए।
इस तरह बीरबल ने बादशाह अकबर को नाराज किए बगैर उन्हें अपना किया हुआ वादा याद दिलाया और अपना इनाम लिया।