
Ke khud nu mazboot karde karde mein pathar ban jawa..!!

वो भी हमको मिल गया है क्या सितम है,
ग़म ही ग़म है क्या ही क्या है क्या सितम है।
देख ले इक मर्तबा तेरी तरफ़ जो,
रात दिन मांगे दुआ है क्या सितम है।
ज़िंदगी मेरी कहीं बस बीत जाए
बे वफ़ा तो हो गया है क्या सितम है।
इश्क़ तेरा अब जहर सा हो गया है,
वो जहर ही अब दवा है क्या सितम है।
आज कल घर से निकलते ही नहीं हो,
यार तुमको क्या हुआ है क्या सितम है।
"Raat k andehere main kuch toh shore macha rha h jo na hokar bhi itna kyu yaad aarha h dil ki shikayte or khamoshi zubaan pe aati nhi h bas ye gehri sanaate main khota jaa rha hun ye raat bhi gumshum si h jo mere ander ki shore chupa rha h
“