
Tere gmaan nu lpett me
apni zindagi ch utaar lawa
mulakaat ik fir howe injh
ke ik mulakaat ch me poori zindagi guzaar lawaan

Tere gmaan nu lpett me
apni zindagi ch utaar lawa
mulakaat ik fir howe injh
ke ik mulakaat ch me poori zindagi guzaar lawaan
me kitaab ban jawangi
tu mainu padhan wala ta ban
me tere lai sab kujh kar jawaangi
tu mainu samjaun wala ta ban
ਮੈਂ ਕਿਤਾਬ ਬਣ ਜਾਵਾਂਗੀ
ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ ਪੜਣ ਵਾਲਾਂ ਤਾਂ ਬਣ
ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਲਈ ਸਭ ਕੁਝ ਕਰ ਜਾਵਾਂਗੀ
ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ ਸਮਝਾਉਣ ਵਾਲਾਂ ਤਾਂ ਬਣ..
👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧
एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।
बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।
ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।
आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।
कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।