rona taa saadde mukadraa vich hi si
aukaat to uchi mohobat jo kar baithaa hai
ਰੋਣਾ 🥺ਤਾ ਸਾਡੇ ਮੋਕਦਰਾ ਵਿਚ ਹੀ ਸੀ
ਔਕਾਤ ਤੋਹ ਉੱਚੀ ਮੋਹੱਬਤ ਜੋ ਕਰ ਬੈਠਾ ਹਾਂ
rona taa saadde mukadraa vich hi si
aukaat to uchi mohobat jo kar baithaa hai
ਰੋਣਾ 🥺ਤਾ ਸਾਡੇ ਮੋਕਦਰਾ ਵਿਚ ਹੀ ਸੀ
ਔਕਾਤ ਤੋਹ ਉੱਚੀ ਮੋਹੱਬਤ ਜੋ ਕਰ ਬੈਠਾ ਹਾਂ

बिछड़ के मुझसे, इन गलियों में कितनी दूर जाओगे...
परवानों की बस्ती है, जहां जाओगे मुझे हर जगह पाओगे...
गुज़रा पल, मीठी बातें और वो हसीन शामें सब बुलाते हैं तुम्हे...
इक झूठ ही सही बस कहदो के तुम कल आओगे,
इंतज़ार करना पसंद नहीं पर, मेरी नज़रें राहों पर टिकी हैं...
पता है मुझे रास्ता बदल गया तुम्हारा लेकिन, दिलासा दिए बैठा हूं के तुम कल आओगे...