Gazab di himmat diti hai us rab ne mainu
oh dagabaji kari jande ne
te asi wafadaari kari jaande haan
ਗ਼ਜ਼ਬ ਦੀ ਹਿੰਮਤ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਉਸ ਰੱਬ ਨੇ ਮੈਨੂੰ..
ਉਹ ਦਗਾਬਾਜੀ ਕਰੀ ਜਾਂਦੇ ਨੇ,
ਤੇ ਅਸੀਂ ਵਫ਼ਾਦਾਰੀ ਕਰੀ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ….!!!
Gazab di himmat diti hai us rab ne mainu
oh dagabaji kari jande ne
te asi wafadaari kari jaande haan
ਗ਼ਜ਼ਬ ਦੀ ਹਿੰਮਤ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਉਸ ਰੱਬ ਨੇ ਮੈਨੂੰ..
ਉਹ ਦਗਾਬਾਜੀ ਕਰੀ ਜਾਂਦੇ ਨੇ,
ਤੇ ਅਸੀਂ ਵਫ਼ਾਦਾਰੀ ਕਰੀ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ….!!!
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा
Takdeeran da khel eh sabh
khahishaan hi ne bande diyaan
jo samajhdiyaan ni
ਤਕਦੀਰਾਂ ਦਾ ਖੇਲ ਇਹ ਸਬ
ਖਾਹਿਸ਼ਾਂ ਹੀ ਨੇ ਬੰਦੇ ਦੀਆਂ
ਜੋ ਸਮਝਦੀਆਂ ਨੀ