Pyaar Saade Di Likhni Si Jo Gazal Adhoori Ae
Yaadan dE Varke Vi Hun Ta Fattde Jande Ne
Khush Reh Yaara Tuu Apni Zindgi Vich
#Reet di Zindgi dE Din tA Ghatde Jande Ne
Pyaar Saade Di Likhni Si Jo Gazal Adhoori Ae
Yaadan dE Varke Vi Hun Ta Fattde Jande Ne
Khush Reh Yaara Tuu Apni Zindgi Vich
#Reet di Zindgi dE Din tA Ghatde Jande Ne
Pyar to zindagi ka ek afsana hai,
Iska apna hi ek trana hai,
Sabko maloom hai ke milenge aansu
Par na jane kyu, duniya mein har koi iska deewana hai..!!
प्यार तो जिंदगी का एक अफसाना है,
इसका अपना ही एक तराना है,
सबको मालूम है कि मिलेंगे सिर्फ आंसू
पर न जाने क्यों, दुनियां में हर कोई इसका दीवाना है..!!
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।