रख हौसला वो मंजर भी आएगा
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा
थक कर ना बैठ ए मंजिल के मुसाफिर
मंजिल भी मिलेगी मिलने का मजा भी आएगा
रख हौसला वो मंजर भी आएगा
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा
थक कर ना बैठ ए मंजिल के मुसाफिर
मंजिल भी मिलेगी मिलने का मजा भी आएगा
Aaj zindagi se fir ek vaada kia…
jeene ka fir ek iraada kia
Hai gum bhut saare lekin fir bhi
Muskuraane ka ek bahaana kia
Aankhon mein nami hai or hothon m kayi jazbaat
Ki aaj fir likhne ka sahara lia…..
है वो मेरी मोहब्बत की रूह, इसलिए पास मेरे वो रहती है..
मुझे पागल समझेगी ये दुनिया, तभी वो कुछ ना कहती है..
सुबह उठे साथ में वो मेरे, शाम आंखों के साथ वो ढलती है..
वो जी ना सकी जो साथ मेरे, तो मरके साथ में चलती है..
राहें तो बदल गयीं उसकी मगर, राहौं से मुडी वो रहती है..
मेरी रूह से जुडना है हक उसका, तभी साथ जुडी वो रहती है..
हर खुशी बांटती है मेरी, हर गम मेरे संग सहती है..
मुझे वो लगती है अपनी, और मुझे वो अपना कहती है….