वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो…♥️
Wo shama ki mahfil hi kya,
Jisme dil khak na ho,
Maja toh tab hain chahat ka,
Jab dil toh jale par rakh na ho..♥️
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो…♥️
Wo shama ki mahfil hi kya,
Jisme dil khak na ho,
Maja toh tab hain chahat ka,
Jab dil toh jale par rakh na ho..♥️
याद उसकी आती हमें,
उसे खबर नहीं मगर।
याद उसकी आती हमें,
वो नसीब में नहीं मगर।
याद उसको करते करते,
मर जायेंगे एक दिन यूंही,
बदनसीब इस दिल का क्या कीजिए,
याद उसकी आती हमें,
उसे बता सकते नहीं मगर।
Bas thoda jeha jar lawi menu
Ke mein tere kaabil nahi💔..!!
Hun nafrat kar lawi menu
Ke mein tere kaabil nahi💔..!!
ਬਸ ਥੋੜਾ ਜਿਹਾ ਜਰ ਲਵੀਂ ਮੈਨੂੰ
ਕਿ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਕਾਬਿਲ ਨਹੀਂ💔..!!
ਹੁਣ ਨਫ਼ਰਤ ਕਰ ਲਵੀਂ ਮੈਨੂੰ
ਕਿ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਕਾਬਿਲ ਨਹੀਂ💔..!!