वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो…♥️
Wo shama ki mahfil hi kya,
Jisme dil khak na ho,
Maja toh tab hain chahat ka,
Jab dil toh jale par rakh na ho..♥️
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो…♥️
Wo shama ki mahfil hi kya,
Jisme dil khak na ho,
Maja toh tab hain chahat ka,
Jab dil toh jale par rakh na ho..♥️
कुछ हलचल सी है सीने में
सुकून कुछ खोया – सा है
जाने कैसी है ये अनुभूति
दिल कुछ रोया – सा है
कुछ आहट सी आयी है
और दिल कुछ धड़का – सा है।
हाथ – पाँव में हो रही कंपन-सी
बेचैनी ये जानी पहचानी – सी है
सांसे भी है कुछ थमी – सी
कितने वक्त गुज़र गये इन्तजार में
मेरी आहें भी हैं कुछ जमी – सी।
पलकें अब मूँदने लगी हैं
साँसें अब क्षीण पड़ रही हैं
अब तो आ जाओ इन लम्हों में
जाने कब लौटोगे?
आने का वादा था और ना भी था तो,
तुम्हारा इन्तज़ार तो था..
सारी हदें तोड़ कर आ जाओ
दुनिया की रस्मों को छोड़ कर आ जाओ
चंद लम्हों के लिए ही,
अब तो आ जाओ
मेरे लिए.. सिर्फ मेरे लिए |
Jithe ek nu shdd k duja mil jawe..
Kde jayie na ese raahan te..!!
“Roop” pyar howe taan esa sacha howe..
sajjan vsseya howe vich saahan de..!!
ਜਿੱਥੇ ਇੱਕ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਦੂਜਾ ਮਿਲ ਜਾਵੇ
ਕਦੇ ਜਾਈਏ ਨਾ ਐਸੇ ਰਾਹਾਂ ਤੇ..!!
“ਰੂਪ”ਪਿਆਰ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਐਸਾ ਸੱਚਾ ਹੋਵੇ
ਸੱਜਣ ਵੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਵਿੱਚ ਸਾਹਾਂ ਦੇ..!!