वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो…♥️
Wo shama ki mahfil hi kya,
Jisme dil khak na ho,
Maja toh tab hain chahat ka,
Jab dil toh jale par rakh na ho..♥️
Enjoy Every Movement of life!
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो…♥️
Wo shama ki mahfil hi kya,
Jisme dil khak na ho,
Maja toh tab hain chahat ka,
Jab dil toh jale par rakh na ho..♥️
हमारे बिन तुम अधूरे ही रहोगे,
किसी ने चाहा शिद्दत से ऐसा तुम खुद कहोगे,
हम न होंगे मौजूद तो ये आलम भी कहेगा,
मिलेंगे तुझको बहुत पर हम जैसा पागल कोई ओर
