बिना मेकअप के ही लगती वो क़ुदरत की शान,
सादगी में बसी है उसकी पूरी पहचान।
उसकी मासूमियत में है कुछ खास,
निगाहों से बयां होती है दिल की हर बात।
बिना मेकअप के ही लगती वो क़ुदरत की शान,
सादगी में बसी है उसकी पूरी पहचान।
उसकी मासूमियत में है कुछ खास,
निगाहों से बयां होती है दिल की हर बात।
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बेचैन,
ठोकरें बहुत है राह में,बीत गए वो दिन रैन,
सोचा ना था यूं सौदा करूंगा,
बूंदों सी बारिश में प्यासा चलूंगा,
पसीने से तर है दामन मेरा
कैसे बायां करूं हाल ए दिल अपना के,
कैसे भीगते हैं मेरे नैन,
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बेचैन,
शाम भी बीत गई, सूरज भी ढल गया,
रास्तों पर निकला तो वक्त भी बदल गया,
ठोकरें बहुत खाई अब थोड़ा संभाल गया,
किससे कहूं फिर भी भीगते हैं मेरे नैन,
मंज़िल अभी दूर है, मुसाफिर है बैचेन,
मेरा हिस्सा था जिनमें कुछ लम्हे चुरा लाया हूं,
हर कदम के साथ कुछ करीब आया हूं,
किनारों पर समेटकर कुछ लेहरें लाया हूं,
दो पल ही सही वापस आए वो दिन रैन,
मै ही हूं वो मुसाफिर, मै ही था बेचैन…
Hmaare baare me baat tak nhi krte vo
Or ham unke baare me soch soch kar muskurate hai