बिना मेकअप के ही लगती वो क़ुदरत की शान,
सादगी में बसी है उसकी पूरी पहचान।
उसकी मासूमियत में है कुछ खास,
निगाहों से बयां होती है दिल की हर बात।
Enjoy Every Movement of life!
बिना मेकअप के ही लगती वो क़ुदरत की शान,
सादगी में बसी है उसकी पूरी पहचान।
उसकी मासूमियत में है कुछ खास,
निगाहों से बयां होती है दिल की हर बात।
कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
[feed_adsense]
