Kyu sab sahi hai fir bhi sahi nahi ..
raat bhi h sath bhi h phir bhi vo baat nhi …
Kami bhi hai par kami kuch bhi nahi😶
क्यों सभ सही है फिर भी सही नहीं
रात भी है साथ भी है फिर भी वो बात नहीं
कमी भी है पर कमी कुछ भी नहीं😶
Kyu sab sahi hai fir bhi sahi nahi ..
raat bhi h sath bhi h phir bhi vo baat nhi …
Kami bhi hai par kami kuch bhi nahi😶
क्यों सभ सही है फिर भी सही नहीं
रात भी है साथ भी है फिर भी वो बात नहीं
कमी भी है पर कमी कुछ भी नहीं😶
Aye dost hum ne tark-e-mohabbat ke bawjood,
Mehsoos ki hai teri zaroorat kabhi kabhi..
वो बाहों में मुझे लेके,,,
शादी किसी और से रचाना चाहता है,,,
वो हम बिस्तर तो होता है,,,
हमसफर किसी और को बनाना चाहता है,,,
वो वक्त काटता मेरे साथ है,,,
वक्त बिताना किसी और के साथ चाहता है,,,
वो मुस्कुराता मेरे साथ है,,,
वो मुस्कान किसी और का बनना चाहता है,,,
वो हाथ थामे तो मेरा चलता है,,,
वो जिंदगी का सफर किसी और के साथ चलना चाहता है,,,
वो बाहों में मुझे लेके,,,
शादी किसी और से रचाना चाहता है….।।