Jinhe pahuchana tha paigam aman ka is jaha me
Wo hindu aur muslim ke maslo me uljhe hue hai
जिन्हें पहुंचाना था पैगाम अमन का इस जहान में
वो हिन्दू और मुस्लिन के मसलों में उलझे हुए हैं
Jinhe pahuchana tha paigam aman ka is jaha me
Wo hindu aur muslim ke maslo me uljhe hue hai
जिन्हें पहुंचाना था पैगाम अमन का इस जहान में
वो हिन्दू और मुस्लिन के मसलों में उलझे हुए हैं
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।
Mukki reejh tamanna koi rakhne di
Khuab udde asmani mere dhool ban ke..!!
Baki reha na kuj mere andar hun bas
Teri yaad seene khubh gayi e sool ban ke..!!
ਮੁੱਕੀ ਰੀਝ ਤਮੰਨਾ ਕੋਈ ਰੱਖਣੇ ਦੀ
ਖ਼ੁਆਬ ਉੱਡੇ ਅਸਮਾਨੀਂ ਮੇਰੇ ਧੂਲ ਬਣ ਕੇ..!!
ਬਾਕੀ ਰਿਹਾ ਨਾ ਕੁਝ ਮੇਰੇ ਅੰਦਰ ਹੁਣ ਬਸ
ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਸੀਨੇ ਖੁੱਭ ਗਈ ਏ ਸੂਲ ਬਣ ਕੇ..!!