
baapu di pagg mitti ch rulai ni
pagg ban sir te kade ghedi v lai ni
kalli jandi dekh kudhi kade bulai ni
kise de mooho khoh aap khaani
saani bebe ne sikhai ni

मैंने मेरे मन में
एक भरोसा पाला
उसे कभी क़ैद नहीं किया
वह जब-जब उड़ा फिर लौट आया
चिड़िया जैसे नन्हे पंख उगे
धरती के गुरुत्व के विरुद्ध पहली उड़ान
पहला लक्षण था आज़ादी की चाहना का
भरोसे के भीतर एक और भरोसा जन्मा
और ये सिलसिला चलता रहा
अब इनकी संख्या इतनी है
कि निराश होने के लिए
मुझे अपने हर भरोसे के पंख मरोड़कर
उन्हें अपाहिज बनाना होगा!
करना होगा क़ैद
जो मैं कर नहीं पाऊँगी
हैरानी! मैं ऐसा सोच भी पाई
अपनी इस सोच पर बीती रात घंटों सोचा
ख़ुद पर लानतें फेंकीं
कोसा ख़ुद को
मन ग्लानि से भर उठा
आँखों के कोने भीगते गए
और फिर इकठ्ठा किया अपना सारा प्यार
उनके पंखों को सहलाया
हर एक भरोसे को पुचकारा
उनके सतरंगे पंखों को
आज़ादी के एहसास से भरते देखा
सुबह तक वे एक लंबी उड़ान पर निकल चुके थे
उनकी अनुपस्थिति में
मैं निराश!
पर जान पा रही थी कि शाम तक वे लौट आएँगे
यह वह भरोसा है
जिसके पंख अभी उगने बाक़ी हैं
जो अभी ही है जन्मा!
Jado aulad baap di chitti dahrri fadhdi aa
te karje di sooi sir ote chadh di aa
fir jind raah faahe wala fadhdi aa
jehrra c laake sharta modheaa te suhage chakda
ajh bhaar na karje da chak hoyeaa
ajh baap naal beh ke pardesi put phone te royeaa
ਜਦੋ ਅਲਾਦ ਬਾਪ ਦੀ ਚਿੱਟੀ ਦਾੜੀ ਫੜਦੀ ਆ
ਤੇ ਕਰਜੇ ਦੀ ਸੂਈ ਸਿਰੋ ੳੱਤੇ ਚੜਦੀ ਆ
ਫੀਰ ਜਿੰਦ ਰਾਹ ਫਾਹੇ ਵਾਲਾ ਫੜਦੀ ਆ
ਜਿਹੜਾ ਸੀ ਲਾਕੇ ਸ਼ਰਤਾ ਮੋਡੇਆ ਤੇ ਸੁਹਾਗੇ ਚੱਕਦਾ
ਅੱਜ ਭਾਰ ਨਾ ਕਰਜੇ ਦਾ ਚੱਕ ਹੋਈਆ
ਅੱਜ ਬਾਪ ਨਾਲ ਬੇਹ ਕੇ ਪਰਦੇਸੀ ਪੁੱਤ ਫੋਨ ਤੇ ਰੋਈਆ