Sham toh abhi bhi roj hoti hai, kafir
Baat yeh hai ke ab wo laut kar ghar nahi aate शाम तो अभी भी रोज़ होती है, काफ़िर,
बात ये है कि अब वो लौट कर घर नहीं आते...
Sham toh abhi bhi roj hoti hai, kafir
Baat yeh hai ke ab wo laut kar ghar nahi aate शाम तो अभी भी रोज़ होती है, काफ़िर,
बात ये है कि अब वो लौट कर घर नहीं आते...
Dekh sajjna kese ne hoye haal mere
Kol nahi e fir vi tu dise naal mere..!!
ਦੇਖ ਸੱਜਣਾ ਕੈਸੇ ਨੇ ਹੋਏ ਹਾਲ ਮੇਰੇ
ਕੋਲ ਨਹੀਂ ਏ ਫ਼ਿਰ ਵੀ ਤੂੰ ਦਿਸੇਂ ਨਾਲ ਮੇਰੇ..!!
वफ़ा के शीश महल में सजा लिया मैनें ,
वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें,
ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई ,
ग़मों कि ओट में ख़ुद को छुपा लिया मैनें,
कभी न ख़त्म किया मैं ने रोशनी का मुहाज़ ,
अगर चिराग़ बुझा, दिल जला लिया मैनें,
कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था ,
वो तीर अपने कलेजे पे खा लिया मैनें |