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Kartikey Singh

Every word has a character and Each line has it's own world.... Insta: Qafir_khayal

बेखौफ दिल लेकर || Khoobsurat shayario

बेखौफ दिल लेकर,
बेपर्दा घूमने का शौंक रखते हैं,
उन्हे इश्क़ की क्या ज़रूरत,
जो सूरत खूबसूरत रखते हैं...

Thoda se muskuraa de e kafir

थोड़ा मुस्कुरा दे ए काफ़िर,
के कयामत बीत गई,
मायूसी तो रहेगी ही चेहरे पर,
फिर आशियाना बसाते बसाते...

Kush toh kimti || maa 2 lines shayari

Kush toh kimti hai us maili saadhi ke pallu me
warna maa ke aanchal ke liye duniyaa tarsti hai 
कुछ तो कीमती है उस मैली साड़ी के पल्लू में,
वरना मां के आंचल के लिए दुनिया तरसती नहीं..

Sham toh abhi bhi roj || kya baat shayari

Sham toh abhi bhi roj hoti hai, kafir
Baat yeh hai ke ab wo laut kar ghar nahi aate 
शाम तो अभी भी रोज़ होती है, काफ़िर,
बात ये है कि अब वो लौट कर घर नहीं आते...

रोक ले जो हौसले मेरे

रोक ले जो हौसले मेरे,
मेरी कोशिशें इतनी कम नहीं है,
छोड़ दूं अपनी मंज़िल डर से तेरे,
ए हवा तुझमें अभी इतना दम नहीं है,
टकरा ले मुझसे गर हिम्मत है तो,
मैं औरों सा नहीं, किसी से कम नहीं...

Baat bas itni si hai k || Dua shayari hindi

बात बस इतनी सी है कि...
जिस दर में सिर झुकाओ तो अपनी
नीयत साफ रखना,
दुआएं भी नीयत से होती है,
दुआओं की कोई नीयत नहीं होती...

Maana tumhe har baar dekhta hu || love shayari

माना तुम्हे हर बार देखता हूं,
हर बार पहली बार देखता हूं,
देखता हूं तुम्हे जब जुल्फें संवरती हो तुम,
उन जुल्फों को आइना बनके हर बार देखता हूं,
आंखो में रातें और सुर्खी में ग़ुलाब जैसे,
मेरे हाथ खाली जाम तुम्हारे होंठो में शराब जैसे,
जैसे हर बार तुम्हारा वो ख़्वाब देखता हूं,
तुम्हारे हाथों में मेरा दिया वो ग़ुलाब देखता हूं,
वक्त हो तो आना कभी इक हसरत बाकी है,
तुम्हे हर बार की तरह पहली बार देखना बाकी है...

हिम्मत भी है ताकत भी और हौसला भी…

हिम्मत भी है ताकत भी ओर हौसला भी
उनकी खुशी के लिए सब कुछ कर जाऊंगा
देखेगी दुनिया भी इस अंजान चेहरे को
जब बाहों में समेटकर में चांद लेकर आऊंगा
मेरी मां के चेहरे पर मुस्कुराहट होगी
और हाथो मेरे लिए में नूर होगा
हवाओं में भी खुशबू होगी और
पापा की नज़रों में गुरूर होगा
सुरूर होगा जब दुनिया अपनी सी लगेगी
जब दुनिया को मेरा भी शउर होगा
अपनी नज़रों में तालाब की आवाम भर लाऊंगा
हर शाम में लौट कर जब घर आऊंगा
हाथों में रोटी पकड़कर कहेगी, बेटा खा ले
मैं मुस्कुराकर दो निवाले उसे भी खिलाऊंगा
खैर, निकल पड़ा हूं अभी मंज़िल ढूंढने खुद ही
इंतेज़ार उस वक्त का है जब मै चांद समेट लाऊंगा...

Kartikey Singh

Every word has a character and Each line has it's own world.... Insta: Qafir_khayal