ik sohna chehra chand vaag naal rehnda si
paun lai usnu, sadaa hanere vich me rehnda si
ਇੱਕ ਸੋਹਣਾ ਚੇਹਰਾ ਚੰਦ ਵਾਗ ਨਾਲ ਰਹਿੰਦਾ ਸੀ,
ਪਾਉਣ ਲਈ ਉਸਨੂੰ ਸਦਾ ਹਨੇਰੇ ਵਿੱਚ ਮੈ ਰਹਿੰਦਾ ਸੀ।
..ਕੁਲਵਿੰਦਰਔਲਖ
ik sohna chehra chand vaag naal rehnda si
paun lai usnu, sadaa hanere vich me rehnda si
ਇੱਕ ਸੋਹਣਾ ਚੇਹਰਾ ਚੰਦ ਵਾਗ ਨਾਲ ਰਹਿੰਦਾ ਸੀ,
ਪਾਉਣ ਲਈ ਉਸਨੂੰ ਸਦਾ ਹਨੇਰੇ ਵਿੱਚ ਮੈ ਰਹਿੰਦਾ ਸੀ।
..ਕੁਲਵਿੰਦਰਔਲਖ
हकीक़त बता रहा हु, ये सपना समझ रहे हैं
और हर एक आशिक़ का दर्द, एक जैसा है
मैं अपना सुना रहा हूं,ये अपना समझ रहें है
हिम्मत भी है ताकत भी ओर हौसला भी
उनकी खुशी के लिए सब कुछ कर जाऊंगा
देखेगी दुनिया भी इस अंजान चेहरे को
जब बाहों में समेटकर में चांद लेकर आऊंगा
मेरी मां के चेहरे पर मुस्कुराहट होगी
और हाथो मेरे लिए में नूर होगा
हवाओं में भी खुशबू होगी और
पापा की नज़रों में गुरूर होगा
सुरूर होगा जब दुनिया अपनी सी लगेगी
जब दुनिया को मेरा भी शउर होगा
अपनी नज़रों में तालाब की आवाम भर लाऊंगा
हर शाम में लौट कर जब घर आऊंगा
हाथों में रोटी पकड़कर कहेगी, बेटा खा ले
मैं मुस्कुराकर दो निवाले उसे भी खिलाऊंगा
खैर, निकल पड़ा हूं अभी मंज़िल ढूंढने खुद ही
इंतेज़ार उस वक्त का है जब मै चांद समेट लाऊंगा...