I have learned that sometimes “sorry” is not enough.
Sometimes you actually have to change.
I have learned that sometimes “sorry” is not enough.
Sometimes you actually have to change.
tere husn ko parde kee zarurat hee kya hai,
kaun hosh mein rahata hai tujhe dekhane ke baad…
तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद… 💖💖
है वो मेरी मोहब्बत की रूह, इसलिए पास मेरे वो रहती है..
मुझे पागल समझेगी ये दुनिया, तभी वो कुछ ना कहती है..
सुबह उठे साथ में वो मेरे, शाम आंखों के साथ वो ढलती है..
वो जी ना सकी जो साथ मेरे, तो मरके साथ में चलती है..
राहें तो बदल गयीं उसकी मगर, राहौं से मुडी वो रहती है..
मेरी रूह से जुडना है हक उसका, तभी साथ जुडी वो रहती है..
हर खुशी बांटती है मेरी, हर गम मेरे संग सहती है..
मुझे वो लगती है अपनी, और मुझे वो अपना कहती है….