sunsan raah hoe ne sajjna
tere dil de te mere shehar de
ਸੁੰਨਸਾਣ ਰਾਹ ਹੋਏ ਨੇ ਸੱਜਣਾਂ
ਤੇਰੇ ਦਿਲ ਦੇ ਤੇ ਮੇਰੇ ਸ਼ਹਿਰ ਦੇ
sunsan raah hoe ne sajjna
tere dil de te mere shehar de
ਸੁੰਨਸਾਣ ਰਾਹ ਹੋਏ ਨੇ ਸੱਜਣਾਂ
ਤੇਰੇ ਦਿਲ ਦੇ ਤੇ ਮੇਰੇ ਸ਼ਹਿਰ ਦੇ
खुशबू नहीं है मुझमें,
पर गुलशन महकाएं बहुत है...
मुझे आज़माया नहीं किसी ने,
मैनें अपनें आज़माएं बहुत हैं...
मैं रौनक पसंद हूं पर रौनक नहीं है मुझमें,
बुला रहे हो महफिल में वो झलक नहीं मुझमें...
इंतजाम मेरी खातिर बस इतना कर लेना
कड़वा हूं मैं,
कुछ कहूं तो मेरे होंठो पर ज़हर रख देना....
हो विष्णु तुम धरा के,
हल सुदर्शन तुम्हारा !!
बिना शेष-शैया के ही,
होता दर्शन तुम्हारा !!
पत्थर को पूजने वाले,
क्या समझेंगे मोल तेरा !!
माँ भारती के ज्येष्ठ सुत,
तुमको नमन हमारा !!!
तरुण चौधरी