तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Enjoy Every Movement of life!
तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
बड़ी खुशनसीब हूं,
आप हमें मिलें,
हो गई हर तमन्ना पूरी,
जबसे आप हमारी जिंदगी में दखल हुए।
इस संसार में…
सभी के लिए प्रेम की अपनी – अपनी शक्लें हैं,
मेरे लिए प्रेम की शक्ल हुबहू ठीक
तुम्हारे जैसी है…🥀