तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Enjoy Every Movement of life!
तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Aaj fir se un se mulakat hui
Aankhon hi ankhon mein dheere se baat hui
Aaj fir se esa laga koi apna mil gya
Unke jane ke baad bhut tez barsaat hui…
आज फिर से उन से मुलाकत हुई…
आँखो ही आँखो मे धीरे से बात हुई
आज फिर से ऐसा लगा कोई अपना मिल गया …
उनके जाने के बाद बहुत तेज बरसात हुई ….
