तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Enjoy Every Movement of life!
तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
कई दिनो से अपने तकिए के भिगोये नही हूं,
एक मुद्त गुझर गई जी भर के रोया नही हूं
पता नही अब वोक नींद कब मिलेगी
कई रातो से मीठे ख्वाबो मे खोया नही हुं
Bhut dino se koi sada mijaji bhi nhi mila,
Lagta hai,
Gunahgaar hai sare duniya wale jo sir jhuka kar chalte hain…😶
बहुत दिनों से कोई सादा मिजाज़ी भी नहीं मिला,
लगता है,
गुनहगार है सारे दुनिया वाले जो सिर झुका कर चलते हैं…😶