तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Enjoy Every Movement of life!
तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Pasand nahi e sajjna
tu mohobbat e meri..!!
ਪਸੰਦ ਨਹੀਂ ਏ ਸੱਜਣਾ
ਤੂੰ ਮੋਹੁੱਬਤ ਏ ਮੇਰੀ..!!
