तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Enjoy Every Movement of life!
तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...

Ek glti ham roz kar rahe hai
Ki ek galti ham roz kar rahe hai
Jo hame milega nahi ham usi par mar rahe hai🍀
एक गलती हम रोज कर रहे हैं
की एक गलती हम रोज़ कर रहे हैं
जो हमें मिलेगा नही हम उसी पर मर रहे हैं🍀