तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
Enjoy Every Movement of life!
तहजीब, लहज़ा, अदब,
अब तो सब किताबी नज़्म है,
बाज़ार में उतर देखना ग़ालिब,
ईमान की भी कीमत लगने लगी है...
wajha nafrat lai labhi di dila
mohobat te hundi hi bewajha
ਵਜ੍ਹਾ ਨਫਰਤ ਲਈ ਲੱਭੀ ਦੀ ਦਿਲਾਂ,
ਮਹੁੱਬਤ ਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੀ ਬੇਵਜ੍ਹਾ ❤️
