
Tere Intezaar vich mukk rahe Haan..!!

बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”
Sote sote jag jati hu jagte jagte so jati hoon
Fir yaad tumhari aati hai meethe sapno mein kho jati hoon
Apna milna is jeevan mein shayad ab namumkin hai
Khwabon mein hi sahi magar kuch pal ko tumhari ho jati hoon..!!
सोते सोते जग जाती हूँ जगते जगते सो जाती हूँ!
फिर याद तुम्हारी आती है मीठे सपनों मे खो जाती हूँ!
अपना मिलना इस जीवन मे शायद अब नामुमकिन है!
ख्वाबों मे ही सही मगर कुछ पल को तुम्हारी हो जाती हूँ!!