
Dekh tera ishq methon ki kra reha e…!!

main bahut peeti, peeti main bahut tainu bhulan lai
pee k main mehfil sazaai fatt ishq de seen lai
pr chandri eh na charri, te na hi teri yaad mitta saki
ਅੱਜ ਬਹੁਤ ਪੀਤੀ, ਪੀਤੀ ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਤੈਨੂੰ ਭੁੱਲਣ ਲਈ
ਪੀ ਕੇ ਮੈਂ ਮਹਫਿਲ ਸਜਾਈ ਫਟ ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਸੀਨ ਲਈ
ਪਰ ਚੰਦਰੀ ਇਹ ਨਾ ਚੱੜੀ, ਤੇ ਨਾ ਹੀ ਤੇਰੀ ਯਾਦ ਮਿਟਾ ਸਕੀ
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा