
guzaara nahi hunda
Jo videshan ch rulde ne rojji lai
oh jadon desh partange apne kadi
kujh taan sekenge maa de sive di agan
baki kabraan de rukh heth ja behange
ਜੋ ਵਿਦੇਸ਼ਾਂ ‘ਚ ਰੁਲਦੇ ਨੇ ਰੋਜ਼ੀ ਲਈ
ਉਹ ਜਦੋਂ ਦੇਸ਼ ਪਰਤਣਗੇ ਆਪਣੇ ਕਦੀ
ਕੁਝ ਤਾਂ ਸੇਕਣਗੇ ਮਾਂ ਦੇ ਸਿਵੇ ਦੀ ਅਗਨ
ਬਾਕੀ ਕਬਰਾਂ ਦੇ ਰੁੱਖ ਹੇਠ ਜਾ ਬਹਿਣਗੇ
.. Surjit Patar
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।