
guzaara nahi hunda
मुझे भी तीर की तरह बहुत कुछ चुभता हैं 🥺
बस एक तस्वीर की तरह खामोश रहती हुं😶
खामोशियां मेरी मुझसे बातें करती है
हर दर्द खामोशियों का समझती रहती हूं
खामोशी की तह में छुपा कर उलझनें
मुश्किलें अपनी ऐसे आसान कर लेती हूं
पहले उलझती थी बात- बात पर
अब ख़ामोशी से हार मान लेती हूं😊
किसी को रफ्ता-रफ्ता चाहा था , अब किश्तों में मरते हैं ।
कैसे कहें अपना हाल-ए-दिल , क्या बताएँ कि हम मोहब्बत करते हैं ।।
ईश्क की सौदेबाजी में , नीलाम हो गई चाहते मेरी ।
नफा-नुकसान के फासलों में , उम्मीद की गुंजाइश ढूँढा करते हैं ।।
ख्वाबों के शहर में , चाहत का एक ख्याल आया ।
कई जवाबों के बाद , संगीन एक सवाल आया ।।
रूखसत किया जिसे , जिसकी पसंद से हमने ।
वो जो शख्स था , मेरी कई इबादतों के बाद आया ।।❤️🍂