
kabhi keh na sakaa
nazaane kyu tere bin reh na sakaa
yeh to mere shabad hai jo
mujhe sambhale huye hai
warnaa mai toh tere diye
zakhmo ko bhi seh naa skaa

इस जीवन से जुड़ा एक सवाल है हमारा~
क्या हमें फिर से कभी मिलेगा ये दोबारा?
समंदर में तैरती कश्ती को मिल जाता है किनारा~
क्या हम भी पा सकेंगे अपनी लक्ष्य का किनारा?
जिस तरह पत्तों का शाखा है जीवन भर का सहारा~
क्या उसी तरह मेरा भी होगा इस जहां में कोई प्यारा?
हम एक छोटी सी उदासी से पा लेते हैं डर का अंधियारा~
गरीब कैसे सैकड़ों गालियां खा कर भी कर लेतें है गुजारा ?
जिस तरह आसमान मे रह जाते सूरज और चांद-तारा ~
क्या उस तरह रह पाएगा हमारी दोस्ती का सहारा ?
जैसे हमेशा चलती रहती है नदियों का धारा~
क्या हम भी चल सकेंगे अपनी राह की धारा ?
mujhe daphanaane se pahale mera dil nikaal kar use de dena,
main nahi chaahata ke vo khelana chhodh de….
मुझे दफनाने से पहले मेरा दिल निकाल कर उसे दे देना,
मैं नही चाहता के वो खेलना छोङ दे….
Before burying me take out my heart and give it to her,
I don’t want her to stop playing …