teri muhabbat bhee kiraaye ke ghar kee tarah thi,
kitna bhi sajaaya par meri nahin huee……
तेरी मुहब्बत भी किराये के घर की तरह थी,
कितना भी सजाया पर मेरी नहीं हुई……
teri muhabbat bhee kiraaye ke ghar kee tarah thi,
kitna bhi sajaaya par meri nahin huee……
तेरी मुहब्बत भी किराये के घर की तरह थी,
कितना भी सजाया पर मेरी नहीं हुई……

खवाहिशों का ये दौर भी थम जयेगा
था यकीन , जो मेरा है वो मिल जाएगा ,
उम्र भर से सिकुड़ा था जो तमन्नाओ का फूल
क्या मालूम था तुझे देख वो खिल जाएगा ।
है उम्मीद तू साथ चलेगा जो मेरे उम्र भर
टूटे खवाबों का ये मेरा टाकिया सील जाएगा ।
सबर करुगा तेरे मेरे मुकम्मल होने का
यू ही एक दिन मेरा जीवन तुझमे ढल जाएगा ।