
Khud asi tere ton mang ke
Tenu badi vaar maaf kar chukke haan..!!

जो दोस्त बने थे कभी,वो आज मेरे दुश्मन हैं,
चूड़ियां सारीं उसकी,मेरे नाम के दो कंगन हैं,
उस रहीस के लिए, हर एक मौसम है साबन,
यहां पर,ना ज़मीन,ना घर,ना कोई आंगन है,
तुम्हे है खोफ़,तो डालो कोई,नक़ाब चेहरे पर,
ना दिल तोड़ा, ना लूटा, मेरा बेदाग दामन है,
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….