
khuda ki tu moorat lag rahi hai
arey oool bhi sharma jaye tujhe dekh kar
tu itni khoobsurat lag rahi hai

ख़िज़ाँ का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
किसे ख़बर थी बिछड़कर न मिल सकेंगे कभी
न ख़त्म होगा तेरे इन्तिज़ार का मौसम
ग़रज़ का दौर है सबको हैं अपनी अपनी धुन
किसी को रास न आया पुकार का मौसम
ढला है हुस्न तो मशहूर बेवफ़ाई हुई
गुज़र गया है तेरे इन्तिज़ार का मौसम
उड़ाए फिरती है आवारगी की आंधी हमें
हमें नसीब कहाँ ज़ुल्फ़-ए- यार का मौसम
बुझे हैं रेख़्ता हम तो बुझे नज़ारे हैं
उदास उदास लगा हुस्न -ए- यार का मौसम
Ja taan bapanah mohobbat luta sade te
Ja behadd nafrat kar te chadd ke chla ja..!!
ਜਾਂ ਤਾਂ ਬੇਪਨਾਹ ਮੋਹੁੱਬਤ ਲੁਟਾ ਸਾਡੇ ‘ਤੇ
ਜਾਂ ਬੇਹੱਦ ਨਫ਼ਰਤ ਕਰ ਤੇ ਛੱਡ ਕੇ ਚਲਾ ਜਾ..!!