टुकड़े कितने किए तूने बदला पुराना लगता है
तेरे लोट आने की बात अब बहाना लगता है
वैसे तो भूलते नही है हम पर
तेरे साथ बिता वक्त अब पुराना लगता है
टुकड़े कितने किए तूने बदला पुराना लगता है
तेरे लोट आने की बात अब बहाना लगता है
वैसे तो भूलते नही है हम पर
तेरे साथ बिता वक्त अब पुराना लगता है
Hauli hauli din Jo nikal rahe ne tere bin
Hauli hauli zindagi vi nikal jayegi..!!
ਹੌਲੀ ਹੌਲੀ ਦਿਨ ਜੋ ਨਿਕਲ ਰਹੇ ਨੇ ਤੇਰੇ ਬਿਨ
ਹੌਲੀ ਹੌਲੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵੀ ਨਿਕਲ ਜਾਏਗੀ..!!
चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी