Waqt ko baaton mein uljhana aata tha humein
Agar zid tumhari jane ki na hoti✨
वक़्त को बातो में उल्ज़ाना आता था हमे
अगर जिद तुम्हारी जाने की न होती✨
Waqt ko baaton mein uljhana aata tha humein
Agar zid tumhari jane ki na hoti✨
वक़्त को बातो में उल्ज़ाना आता था हमे
अगर जिद तुम्हारी जाने की न होती✨
जो भी दुख याद न था याद आया; आज क्या जानिए क्या याद आया; याद आया था बिछड़ना तेरा; फिर नहीं याद कि क्या याद आया; हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया; जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया; जिस तरह धुंध में लिपटे हुए फूल; इक इक नक़्श तेरा याद आया; ये मोहब्बत भी है क्या रोग जिसको भूले वो सदा याद आया।