use ye kaun batalaaye… use ye kaun samajhae ki,
khaamosh rahane se taalluk toot jaate hai…
उसे ये कौन बतलाये… उसे ये कौन समझाए कि,
खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है…
use ye kaun batalaaye… use ye kaun samajhae ki,
khaamosh rahane se taalluk toot jaate hai…
उसे ये कौन बतलाये… उसे ये कौन समझाए कि,
खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है…
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
ਜੇ ਨਹੀ ਨਿਭਦੀ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ਅੱਖਾਂ ਚਾਰ ਨਾ ਕਰਿਉ
ਜੇ ਕਰੋ ਤਾਂ ਕਰੋ ਸੱਚਾ ਐਵੇ ਵਿਖਾਵੇ ਦਾ ਪਿਆਰ ਨਾ ਕਰਿਉ
ਇੱਕੋ ਯਾਰ ਹੁੰਦਾ ਏ ਰੱਬ ਵਰਗਾ
ਥਾਂ ਥਾਂ ਤੇ ਇਹ ਵਪਾਰ ਨਾ ਕਰਿਉ
ਇੱਕ ਵਾਰ ਹੈ ਮਿਲਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਪਿਆਰ ਵੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਏ
ਸੋਹਣੀਆਂ ਸ਼ਕਲਾ ਵੇਖ ਹਰ ਇੱਕ ਨੂੰ ਇਜਹਾਰ ਨਾ ਕਰਿਉ
ਭਾਈ ਰੂਪੇ ਵਾਲਿਆ ਜੇ ਲਾਈ ਏ ਤੇ ਤੋੜ ਨਿਭਾਈ
ਨਹੀ ਤਾਂ ਗੁਰਲਾਲ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਐਵੇਂ ਇਸ਼ਕ ਬਿਮਾਰ ਨਾ ਕਰਿਉ