Chupke se uski tasveer sirhane mein rakhkar so jata hu mein,
Aur vo mere khwabon mein aa jaya karta hai… 🥀
चुपके से उसकी तस्वीर सिरहाने में रखकर सो जाता हूं मैं,
और वो मेरे ख्वाबों में आ जाया करता है…🥀
Chupke se uski tasveer sirhane mein rakhkar so jata hu mein,
Aur vo mere khwabon mein aa jaya karta hai… 🥀
चुपके से उसकी तस्वीर सिरहाने में रखकर सो जाता हूं मैं,
और वो मेरे ख्वाबों में आ जाया करता है…🥀
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…
हमने तो चारो तरफ पढ़ाई का माहौल बनाया है,
लेकिन फिर भी एग्जाम में अंडा ही आया है,
हम तो यूँ ही चल देते हैं बिना मुंह धोये ही एग्जाम में,
साले दोस्त कहते हैं ये तो बहुत पढ़के आया है।