Me us cheez nu chaah ke aapna vazood hi khatam kar liyaa
Jihnu paun di meri aukaat hi nahi si
ਮੈਂ ਉਸ ਚੀਜ਼ ਨੂੰ ਚਾਹ ਕੇ ਆਪਣਾ ਵਜੂਦ ਹੀ ਖ਼ਤਮ ਕਰ ਲਿਆ
ਜਿਹਨੂੰ ਪਾਉਣ ਦੀ ਮੇਰੀ ਔਕਾਤ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸੀ
Me us cheez nu chaah ke aapna vazood hi khatam kar liyaa
Jihnu paun di meri aukaat hi nahi si
ਮੈਂ ਉਸ ਚੀਜ਼ ਨੂੰ ਚਾਹ ਕੇ ਆਪਣਾ ਵਜੂਦ ਹੀ ਖ਼ਤਮ ਕਰ ਲਿਆ
ਜਿਹਨੂੰ ਪਾਉਣ ਦੀ ਮੇਰੀ ਔਕਾਤ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸੀ
Hindi shayri in female version, female voice with song bilkul socha na by rahat fateh ali khan. beautiful song love song.
us khuda ki is dil pe rehmat ho gai
har khushi gam sehne k liye zindagi sehmat ho gai
aankhe khuli rahi saari raat
yu neend hamari kho gai
zara nazar unse kya mili
to mohobat ho gai
song bilkul socha na tha bilkul samjha na
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।