Ye kalyug hai jnaab
Yhan waqt ghadi ki suiyaa nhi apno ka raviyaa batata hai💯
ये कलयुग है जनाब
यहां वक्त घड़ी की सुइयां नही अपनो का रवैया बताता है 💯
Ye kalyug hai jnaab
Yhan waqt ghadi ki suiyaa nhi apno ka raviyaa batata hai💯
ये कलयुग है जनाब
यहां वक्त घड़ी की सुइयां नही अपनो का रवैया बताता है 💯
आंखों में काजल , माथे पर बिंदी , खुले बालों में जब वो सामने आती है,
मां कसम यार कुछ पल के लिए सांसे थम जाती है ❤️
और जब पास आ कर आंखों में आंखे डाल कर पूछती है
कि कैसी लग रही हूं……
कुछ बोल नही पाता, पर यारों जान निकल जाती है❤️❤️
उनके चेहरे की हंसी पर नजर मेरी तब पड़ी, जब शहर में मेरा आना हुआ..
अब उनके चेहरे पर ही रहती है ये हर घड़ी, और उनका मुझे देख शर्माना हुआ..
मेरी नज़रों पे उनकी नज़रों ने लगाई ऐसी हथ-कडी, ना फिर मेरा कभी घर जाना हुआ..
अब नज़रों से सिर्फ वही देखते हैं, जो वो दिखाती है, ना जाने भरा ये हमने, कैसा हर-ज़ाना हुआ..